Bihar Bridge Collapse : पीएम नरेंद्र मोदी या सीएम नीतीश कुमार… लोकसभा चुनाव से पहले किस सरकार का पुल गिरा

रिपब्लिकन न्यूज़, सुपौल

by Republican Desk

Bihar Bridge Collapse : बिहार में निर्माणाधीन इस पुल को देश का सबसे बड़ा बताया जाता है। क्या बनता, यह राम जाने! बन ऐसा रहा था कि पुल का एक बड़ा हिस्सा पायों के बीच से गिर गया। अबतक एक की लाश निकाली जा चुकी है।

कैसे प्लेट हाथ में हो और उसका एक हिस्सा टूटकर गिर जाए- ऐसा दिख रहा सुपौल में गिरा पुल।

Bihar News : सुपौल में पुल गिरा… यह खबर चर्चा में है

बिहार में सुपौल और मधुबनी जिले के बीच कोसी नदी पर बन रहा देश का सबसे बड़ा पुल चर्चा में है। निर्माणाधीन पुल के पास शुक्रवार सुबह सात बजे कड़कड़ाने की तेज आवाज हुई और जबतक लोग कुछ समझते पायों के बीच का हिस्सा टूटकर गिर पड़ा। पुल के पिलर नंबर 50, 51 और 52 के बीच का गार्डर भरभरा कर गिरने से लोगों को संभलने का मौकान नहीं मिला। जो हिस्सा गिरा, वह नदी के सूखे हिस्से में है। वहां काम कर रहे एक मजदूर की मौके पर मौत हो गई। कई लोग मलबे में दबे हैं। उन्हें निकाला जा रहा है।

खैरियत इतनी ही कि उद्घाटन के पहले गिर गया, वरना कितनी जान लेता- अंदाजा मुश्किल है।

क्रिकेट खेल रहे लड़कों ने घायलों को निकाला

पुल के पिलर से कुछ ही दूर पर लड़के सुबह में क्रिकेट खेलते हैं। खेल शुरू ही हुआ था कि अचानक तेज आवाज से सभी का ध्यान पुल की तरफ गया। कुछ समझ पाने से पहले पुल का स्लैब एक जगह से क्रैक होकर गिर गया। फिर पायों के बीच कई जगह कुछ ही पल में गार्टर गिरने लगे। जब यह गिरना थोड़ा स्थिर हुआ, तो खेल रहे लड़कों के आसपास बाकी लोग भी जुट गए। सभी लोगों ने मिलकर घायल सात मजदूरों को अस्पताल में भर्ती करवाया। एक की लाश निकाली गई। घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए समय पर एम्बुलेंस नहीं मिलने से भी लोग गुस्से में नजर आए। हालांकि, बाद में पुलिस के साथ प्रशासनिक अफसर भी घटनास्थल पर पहुंच गए।

केंद्र सरकार का पुल है, विपक्ष को मुद्दा मिला

शुक्रवार की सुबह बिहार में केंद्र सरकार के भारतमाला परियोजना के तहत बन रहे देश के सबसे बड़े पुल के गिरने की खबर ने विपक्ष को लोकसभा चुनाव 2024 के ठीक पहले बड़ा मुद्दा दे दिया है। बिहार में मधुबनी जिले के भेजा से सुपौल जिले के बकौर (Bheja to Bakaur) के बीच 10 किलोमीटर से ज्यादा लंबा यह पुल दिसंबर तक तैयार होना था। पुल के अलावा तीन किलोमीटर लंबा पहुंच पथ भी इसी साल तैयार करने का लक्ष्य था, ताकि अगले साल की शुरुआत में लोकार्पण भी हो जाए। अब लोकसभा चुनाव के ठीक पहले पुल के एक बड़े हिस्से के गिर जाने के बाद केंद्र की इस परियोजना पर सवालों की बौछार के लिए कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है। सुपौल और मधुबनी जिले की दूरी 30 किलोमीटर कम करने के लिए 1200 करोड़ रुपए की लागत से यह पुल मेजर्स गैमन इंजीनियर्स एंड कांट्रैक्टर्स प्राइवेट लिमिटेड (gammon engineers and contractors private limited) और ट्रांस रेल लाइटिंग लिमिटेड (trans rail lighting ltd) तैयार कर रही है।

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