CAA India : सीएए से खतरे में मुसलमानों की नागरिकता ? ये सच तो कोई जानता ही नहीं, दुनिभर के लोग कर रहे सर्च

रिपब्लिकन न्यूज़, नई दिल्ली

by Republican Desk

CAA India को लेकर भाजपा और भगवा समर्थित लोगों में उत्साह है। दूसरे खेमे में आशंका, नाराजगी, तनाव और बयानबाजी। ऐसे में जानना जरूरी है कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने लोकसभा चुनाव के पहले यह जो लाया है, वह है क्या?

सीएए से चली जाएगी मुसलमानों की नागरिकता?

भ्रम में न खुशी मनाएं, न अफवाहों पर तनाव लें… सच पढ़ें

11 मार्च फिर एक यादगार तारीख बन गई। जानकारी के अभाव में लाखों भारतीयों के सीने पर जख्म के रूप में और दूसरी तरफ करोड़ों लोगों के बीच फैले भ्रम से खुशी के रूप में। सोमवार को केंद्र की नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) सरकार ने भारत में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के नियम (Full Form CAA) लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी है। भारत में तो सीएए की चर्चा है ही, दुनिया के कई देशों में भारत के नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA India) की सच्चाई लोग जानना चाह रहे हैं। गलत खबरों की जगह नागरिकता संशोधन अधिनियम के नियम में बदलाव (what is caa law in india in hindi) को समझना चाहिए।

छीनेगा नहीं नागरिकता, देगा… मगर पहली शर्त पढ़ें

दरअसल, यह कानून किसी को भारत की नागरिकता छीनने का अधिकार नहीं देता है। यही अफवाह फैलाई जा रही है कि इससे मुस्लिम धर्म के लोगों की नागरिकता पर असर पड़ेगा, लेकिन ऐसा नहीं है। कानून में कहीं भी ऐसा प्रावधान नहीं किया गया है। प्रावधान यह है कि नए कानून के तहत अब गैर-मुस्लिम दूसरे देशों के जरूरतमंद लोगों को भारत की नागरिकता आसानी से मिल जाएगी। न तो किसी को अपने आप नागरिकता मिलेगी और न किसी से छीना जाएगा। जो परदेसी विशेष कारणों से भारत की नागरिकता चाहते हैं, वह अगर मुस्लिम नहीं हैं तो इसके लिए आवेदन कर सकेंगे। भारत के गृह मंत्रालय ने इसकी पूरी तैयारी करने के बाद अधिसूचना जारी की है।

तीन देशों में रह रहे छह धर्मों के लोगों को राहत

यह कानून है तो भारत का, लेकिन हमारे तीन पड़ोसी देशों के लोगों पर असल में लागू होगा। पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में रहने वाले गैर-मुसलमानों को प्रताड़ित किया जाता है और वहां उनके रहने लायक परिस्थितियां नहीं हैं। ऐसे गैर-मुसलमानों को भारत की नागरिकता इस संशोधन के बाद आसानी से मिल सकेगी। धर्म विशेष का देश होने के कारण पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में हिंदू, ईसाई, सिख, जैन, बौद्ध और पारसी समुदाय बेहद कष्टदायक जीवन जी रहे हैं। ऐसे परिवारों को धर्मांतरण के बावजूद स्वीकार नहीं किया जा रहा है। ऐसे में भारत ने इनकी भारतीय नागरिकता का द्वार खोलते हुए राहत का संदेश दिया है।

2014 की यह तारीख मायने रखेगी, जान लें

इस कानून का फायदा उठाने के लिए एक शर्त यह है कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से ऐसे प्रवासी 31 दिसंबर 2014 या उससे पहले भारत आए हुए हों। मतलब, उसके बाद आने वाले, इन देशों के इन छह धर्मों से भी जुड़े होंगे तो भी इन्हें इस कानून के तहत भारत की नागरिकता नहीं मिलेगी। ऑनलाइन आवेदन के समय ही यह प्रमाणित करना होगा कि 31 दिसंबर 2014 या उसके पहले से वह भारत में रह रहे हैं। आवेदन पत्र में बताना होगा कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान या बांग्लादेश के नागरिक होने के बावजूद उन्हें वहां किस तरह का धार्मिक उत्पीड़न सहना पड़ा और वह भारत आए। ऐसे आवेदकों को नागरिक कानून 1955 की तीसरी सूची की अनिवार्यताओं को पूरा करना होगा। इसके अलावा, यह भी अनिवार्य है कि वह भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कोई भाषा बोलते हैं।

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