Narendra Modi सरकार ने बुरी तरह फंसाया; जिसे जीत मान रहे Nitish Kumar वही तो कहीं हार का रास्ता नहीं

by Republican Desk

Bihar Caste Survey है या Bihar Caste Census- अब सुप्रीम कोर्ट को फैसला करना है। लेकिन, इसमें केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने कानूनी तरीके से बड़ा खेल कर दिया है। समझना है तो पढ़ें।

जब दूरियां थीं कम…प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार। (फाइल फोटो, क्रेडिट- PMO INDIA)

खबर पर जाने से पहले एक छोटी-सी कहानी पढ़िए-
दो लोग आपस में झगड़ रहे थे। दोनों एक ही परिवार के। एक पिता और दूसरा पुत्र। पुत्र लगातार अपने अधिकार मांग रहा था, जबकि पिता का कहना था कि कुछ अधिकार उसे नहीं दिए जा सकते। लड़ाई लंबी चली। इधर पुत्र ने एक जमीन बेच दी। लोगों ने पिता को उकसाया कि बाकी जमीन तो बंटा हुआ है, लेकिन यह नहीं- इसलिए वह कोर्ट जाए। वह कोर्ट खुद नहीं गया तो लोग चले गए। मामला कोर्ट में था। पिता ने कोर्ट को पहले बताया- “मुझे जो बांटना था, बांटा हुआ है। कानून के तहत यह जमीन मेरे अधिकार क्षेत्र की है।” साथ ही बताया, “जब तक मेरा अस्तित्व है- यह अधिकार किसी को बांटा नहीं जा सकता है।” फिर पिता को लगा कि जो मेरे अधिकार में है, उसे छीनने का अधिकार तो कोर्ट का भी नहीं। इसलिए उसने कोर्ट में दूसरी वाली बात हटा दी। एक बात पर कायम रहा- “मुझे जो बांटना था, बांटा हुआ है। कानून के तहत यह जमीन मेरे अधिकार क्षेत्र की है।” अब कोर्ट ही कानून देखकर फैसला कर दे।

अब समझिए कोर्ट के सामने कैसी स्थिति?
कहानी पढ़ चुके तो अब बताइए कि कोर्ट क्या करेगा? वह खुद संविधान-कानून को खुद देखेगा- यही न? और, अगर संविधान-कानून कहेगा कि बंटे हुए अधिकार में जो पिता के हिस्से का है, उसपर कोई दखल नहीं दे सकता है तो? कुछ ऐसी ही विषम परिस्थिति पैदा कर दी है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में जो हलफनामा दायर किया, उसमें पहले दो बातें थीं- 1. Census is a statutory process and is governed by the Census Act 1948. The Subject of Census is covered in the Union List under Entry 69 in the seventh schedule. In exercise of the powers under the said entry, the Central Government has made the Census Act 1948. The said Act empowers only the Central Government to conduct the census under section 3 of the Census Act. मतलब, संविधान में केंद्र सरकार को ही जनगणना कराने का अधिकार है। और, 2. No other body under the constitution or otherwise is entitled to conduct the exercise of either Census of any action akin to census. मतलब, जनगणना या इस जैसी कोई प्रक्रिया किसी और प्रक्रिया को संविधान किसी अन्य के अधिकार में नहीं देता है। कोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे से दूसरा प्वाइंट बाद में हटाकर संशाेधित हलफनामा दायर किया गया। ध्यान रहे, पहला प्वाइंट वहीं का वहीं कायम है। अब इसका मतलब कानून के जानकार एक ही बता रहे- केंद्र सरकार ने संविधान और संविधान के तहत केंद्र सरकार के अधिकार की रक्षा की महती जिम्मेदारी सुप्रीम कोर्ट पर छोड़ दी।

अब राजनीति में जिसे जो समझना हो, समझता रहे
कोर्ट में हलफनामा देकर संशोधित करने पर बिहार में खूब राजनीति हो रही। भाजपा ने चुप्पी साध ली, लेकिन बिहार में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनता दल (RJD Party) और जनता दल यूनाईटेड (JDU Party) का बयान लगातार सामने आ रहा है। जदयू और राजद के नेता, यहां तक कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव तक कह रहे कि भाजपा नहीं चाहती है जातियों की वास्तविक आबादी जानना। इस बीच जदयू की ओर से मुख्यमंत्री इस रिपोर्ट के आधार पर योजना बनाने की बात कहते रहे और राजद ने आकर कह दिया कि इस आधार पर आरक्षण बढ़ाने की मांग की जाएगी। मतलब, राजनीति में अभी बहुत पेच है। फिलहाल, अब कानूनी तौर पर जो फैसला लेना है- संविधान को समझते हुए सुप्रीम कोर्ट को लेना है।

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