Blood Donation के लिए पहुंचे डॉक्टर-वकील से छात्र तक; जैनेंद्र ज्योति की याद में यह घोषणा

by Republican Desk

Bihar News में आज एक ऐसी खबर सामने ला रहे हैं, जहां हम-आप हैं। यानी, समाज है। समाज को प्रेरणा देने वाले लोग हैं। समाज के लिए खड़े रहे शख्सियत के प्रति श्रद्धाभाव है।

रक्तवीर समाजसेवी-पत्रकार स्व. जैनेंद्र ज्योति को श्रद्धांजलि देते बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता विजय कुमार सिन्हा।

“न जाने कितने शरीर में लहू बनकर जिंदा है हमारा हीरा… यह सिर्फ एक पंक्ति नहीं। भाव नहीं। पूरा सच है। वह सच, जिसका जीता-जागता प्रमाण देश के अलग-अलग हिस्सों में घूम रहा है। पत्रकार और समाजसेवी स्व. जैनेंद्र ज्योति की जिंदगी महज 29 साल थी, लेकिन 49 यूनिट ब्लड देकर उन्होंने कितने लोगों की जिंदगी बचाई होगी- अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है। एक बार रक्तदान से तीन लोगों को जिंदगी मिलती है। मतलब, यह खून संभव है कि तीन अलग-अलग लोगों की रगों में बहे। स्व. जैनेंद्र ज्योति सशरीर हमारे साथ भले न हों, उनका रक्त जिंदा है। रक्तदान का यही संदेश वह देना चाहते होंगे और आज उनका पूरा परिवार हर पुण्यतिथि पर पिछले तीन साल से रक्तदान शिविर का आयोजन कर रहा है। देश के प्रधानमंत्री भी रक्तदान को लेकर बेहद संजीदा हैं और ऐसे युवाओं की प्रेरणा से यह मुहिम तेजी से बढ़ रही है।” बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता और पूर्व मंत्री व पूर्व विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा ने स्व. जैनेंद्र ज्योति की पुण्यतिथि पर पटना के दरियापुर स्थित मां ब्लड सेंटर में श्रद्धांजलि स्वरूप आयोजित रक्तदान शिविर में उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए यह बातें कही। इस शिविर में 52 लोगों ने रक्तदान किया।

रक्तदान की शुरुआत प्रख्यात गैस्ट्रो विशेषज्ञ डॉ. अमित कुमार बंका ने खुद रक्तदान कर की।

अतिथि के रूप में आए चिकित्सक ने रक्तदान से की शिविर की शुरुआत
ऐसा कम ही देखने को मिलता है कि किसी रक्तदान शिविर के उद्घाटन पर आए चिकित्सक ने खुद रक्तदान किया हो। पटना के प्रख्यात पेट रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित कुमार बंका 22 सितंबर को सुबह 8 बजे के पहले पहुंच गए, ताकि उनके ही रक्तदान से श्रद्धांजलि स्वरूप रक्तदान शिविर की शुरुआत हो। रक्तदान के बाद उन्होंने स्व. जैनेंद्र ज्योति के बारे में कहा कि एक बेहद सुलझा हुआ और समाज के लिए समर्पित नौजवान असमय चला गया, लेकिन महान् आत्माओं की जरूरत ईश्वर को भी होती है। उन्होंने मां ब्लड सेंटर की सारी व्यवस्थाओं को देखने के बाद प्रशंसा करते हुए कहा कि किसी भी रक्त को सीधे चढ़ाने की जगह यहां की आधुनिक मशीनों से जांच के बाद चढ़ाना ज्यादा फायदेमंद होगा और खतरा से मुक्त भी होगा। उन्होंने खुशी जताई कि मां ब्लड सेंटर में स्व. जैनेंद्र ज्योति के नाम पर एफ्रेसिस कक्ष समर्पित है।

रक्तदाता सोनी बरियार को सम्मानित करते आईजी विकास वैभव।

आईजी विकास वैभव बोले- जैनेंद्र जी की प्रेरणा जिंदा है
भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अधिकारी आईजी विकास वैभव ने कहा- “रक्तदान महादान है। इसे यदि किसी व्यक्ति ने वास्तविक रूप से साबित किया है तो वह बेगूसराय के रहने वाले जैनेन्द्र ज्योति जी थे। तीन वर्ष पूर्व उनका दुखद निधन हुआ था। सभी लोग मर्माहत थे। लेकिन, उनकी स्मृति में जिस प्रकार से ब्लड डोनेशन कैंप के आयोजन की परंपरा शुरू की गई है और उसे परिवार-समाज के लोग आगे बढ़ा रहे हैं, इसके लिए बहुत शुभकामनाएं। आज जैनेन्द्र जी नहीं हैं, लेकिन उनकी प्रेरणा जिंदा है। रक्तदान से बड़ा कोई दान नहीं हो सकता। रक्तदान करने से स्वास्थ्य बेहतर होता है। लेट्स इंस्पायर बिहार में भी हम लोग लोगों को रक्तदान के लिए जागरूक करते रहते हैं।”

केबीसी एक्सपर्ट और फोर्ब्स 30 अंडर 30 में सूचीबद्ध सामाजिक उद्यमी शरद विवेक सागर ने याद की बातें।

शरद विवेक सागर ने कहा- अपना हर पल समाज को दे गए जैनेंद्र
भारत से अमेरिका तक अपने सामाजिक उद्यम के जरिए नई पीढ़ी को दिशा देने वाले डेक्सटेरिटी ग्लोबल के सीईओ, फोर्ब्स 30 अंडर 30 में सूचीबद्ध भारतीय और कौन बनेगा करोड़पति में सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के साथ एक्सपर्ट के रूप में नजर आने वाले शरद विवेक सागर ने शिद्दत से स्व. जैनेंद्र ज्योति को याद किया। उन्होंने कहा- “जब बिहार के गांव में जाना होता था, तब जैनेंद्र जी एक ऐसे व्यक्ति थे जो खुद कहते थे कि मैं भी साथ चलूंगा। वे जहां भी होते थे, हमेशा रक्तदान के लिए सक्रिय रहते थे। उनके विचार में सबसे बड़ी बात यह थी कि समाज को उनसे कोई फायदा हो। वर्ष 2017 में जब मेरे बड़े भाई बसंत सागर अस्पताल में भर्ती थे, तब लगातार 17 दिन जैनेन्द्र जी मेरे साथ खड़े रहे। ऐसे समय में जब लोग साथ छोड़ देते हैं, तब उन्होंने मेरा साथ दिया। मेरा हौसला भी बढ़ाया। उन्होंने कहा कि आप चिंता छोड़ दीजिए। मैं यहां खड़ा हूं। मैंने समाज के लिए कुछ कर गुजरने की ललक जैनेन्द्र जी के रक्त में देखा है। उन्हें देखकर युवा प्रेरित होते थे। जैनेन्द्र ज्योति जी के रक्तदान से यह साबित नहीं होता था कि वह किसी की मदद कर रहे हैं, बल्कि यह साबित होता था कि किसी भी कीमत पर समाज में उनका योगदान हमेशा बना रहे। वह समाज को न सिर्फ अपना वक्त देते थे, बल्कि उनकी मंशा थी कि वे समाज को एक नई दिशा दें। उनके विचार हमारे रक्त में हमेशा जिंदा रहेंगे। अगले वर्ष से मैं अपनी ओर से कोशिश करूंगा कि जैनेन्द्र जी की तस्वीर का कैरीकेचर टीशर्ट पर बनाकर उन्हें प्रदान किया जाए, जो समाज के लिए ब्लड डोनेट कर रहे हैं।”

रक्तदाता को सम्मानित करते जदयू के पूर्व एमएलसी प्रो. रणवीर नंदन। उनके दाएं पद्मश्री डॉ. गोपाल प्रसाद सिन्हा।

पूर्व एमएलसी प्रो. रणवीर नंदन ने प्रभावित होकर बड़ी घोषणा की
बिहार में सत्तारूढ़ जनता दल यूनाईटेड के पूर्व विधान पार्षद और प्रख्यात शिक्षाविद् प्रो. रणवीर नंदन ने इस मौके पर बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा- “मैं आज उस पुण्य आत्मा को नमन करता हूं। उस जैनेंद्र जी को नमन करता हूं, जिन्होंने अपनी अल्प आयु में यह साबित कर दिया कि अगर आपके अंदर समाज के लिए कुछ कर गुजरने की लालसा हो तो आप कहीं भी रहें- समाज के प्रति आपकी सोच नहीं बदल सकती। ऐसे लोग समाज में शायद बेहद कम समय के लिए आते हैं। यही वजह है कि वह महापुरुष कहलाते हैं। इतिहास के पन्नों में भी अगर आप देखेंगे तो स्वामी विवेकानंद जैसे लोग भले ही कम समय के लिए आए, लेकिन उन्होंने जो प्रेरणा हम सभी को दी- उसी प्रेरणा को साथ लेकर आज भी हम चल रहे हैं। उन्होंने घोषणा की कि इसी साल से शहर के सबसे बड़े सामाजिक कार्यक्रम में स्व. जैंनेंद्र ज्योति के नाम पर रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि चित्रगुप्त पूजा पर गर्दनीबाग ठाकुरबाड़ी में सभी जाति-समूह के लोग जुटते हैं और अब मुख्यमंत्री की मां के नाम पर वहां बने भवन में स्व. जैनेंद्र ज्योति की याद में इसी बार से हर साल रक्तदान शिविर लगाया जाएगा।”

पद्मश्री डॉ. गोपाल प्रसाद सिन्हा ने रक्तदाताओं को सम्मानित किया।

इतनी कम उम्र में 49 बार रक्तदान से समाज को नई दिशा दे गए स्व. जैनेंद्र ज्योति
राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल के मेडिसीन विभागाध्यक्ष रहे प्रसिद्ध न्यूरो फिजिशयन पद्मश्री डॉ. गोपाल प्रसाद सिन्हा ने कहा- “जैनेन्द्र ज्योति ने इतनी कम उम्र में समाज के प्रति जो भाव रखा और जो लकीर खींची है, वह लकीर कभी मिट नहीं सकती। आज हम यहां इतनी संख्या में उपस्थित हैं तो इसके पीछे की वजह बस यही है कि जैनेंद्र ज्योति ने समाज को एक नई दिशा देने की कोशिश की थी। उस कोशिश में वह काफी हद तक सफल भी रहे। लेकिन बेहद ही कम उम्र में उनका इस दुनिया को छोड़कर चला जाना हम सबके लिए बड़ा नुकसान है। फिर भी उनकी मंशा को पूरा करने का यह प्रयास सराहनीय है। जैनेंद्र ज्योति ने 29 साल की उम्र में 49 बार रक्तदान किया, जो औसत और नियम से अधिक है। जरूरत के मद्देनजर कभी-कभी लोग करते हैं, लेकिन इसके लिए जज्बे और समर्पण की जरूरत होती है।”

मां ब्लड सेंटर में आयोजित रक्तदान शिविर में शिक्षाविद्-समाजसेवी सूरज सिन्हा (सबसे बाएं) ने भी विचार व्यक्त किया।

अतुल्य योगदान के कारण हमेशा जिंदा रहेंगे जैनेंद्र
समाजसेवी और शिक्षाविद् सूरज सिन्हा ने कहा- “जैनेन्द्र जी की हमेशा मंशा रहती थी कि जहां रक्तदान हो, वहां वह जरूर पहुंच जाएं। चाहे किसी को भी रक्त की जरूरत हो, तत्काल उसे रक्त की आपूर्ति किसी भी स्थिति में कर दी जाए। किसी की मदद के लिए किसी व्यक्ति का इस कदर समर्पित होना मैंने पहले नहीं देखा था। शायद यही वजह है कि आज भी वे हमारे बीच जिंदा हैं। बेहद ही मिलनसार और हंसमुख व्यक्तित्व के धनी जैनेंद्र जी हमारी स्मृतियों में हमेशा रहेंगे। हम उन्हें जीवित रखेंगे। ताकि, समाज को एक प्रेरणा मिल सके। प्रेरणा इस बात की कि अगर आप समाज के लिए कुछ करते हैं तो समाज आपको हमेशा याद रखेगा। जैनेंद्र जी ने अपने अल्पायु में जो कुछ किया, वह अतुलनीय है और उसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।”

वक्ताओं ने मां ब्लड सेंटर का भ्रमण किया। पीछे दिख रहे पत्रकार निविड़ शिवपुत्र। सबसे बाएं मीडियाकर्मी संदीप पांडेय।

शिवपुत्र बोले- छोटा मगर सार्थक जीवन की प्रेरणा दे गए जैनेंद्र
‘युवाओं के बीच रक्तदान की प्रेरणा और जैनेंद्र ज्योति का योगदान’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी में धन्यवाद ज्ञापन करते हुए वरिष्ठ पत्रकार निविड़ शिवपुत्र ने कहा- “यह मेरे लिए यह भावुक कर देने वाला पल है। जैनेंद्र हमारे सहोदर भ्राता की तरह थे। उनकी को मैंने करीब से देखा है। उनके विचारों को जानने का अवसर मिला है। शायद यही वजह है कि एक बार मैंने खुद से पूछा कि लंबा मगर निरर्थक जीवन या छोटा मगर सार्थक जीवन, दोनों में से क्या सही हैं? तो मुझे समझ आया कि जीवन भले छोटा हो, लेकिन सार्थक होना चाहिए। यह प्रेरणा जैनेंद्र जी की जिंदगी से हमें मिलती है। छोटी-सी उम्र में समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन जाना बहुत बड़ी बात है। हम हमेशा जैनेंद्र जी को इसी तरह जीवित रखेंगे। जैनेंद्र ने अपनी छोटी-सी जिंदगी में इतना बड़ा काम कर दिया कि वह सदैव हमारे बीच उपस्थित रहेंगे। मैं प्रो. रणवीर नंदन जी का धन्यवाद करता हूं कि उन्होंने जैनेंद्र जी की याद में एक बड़ी घोषणा की और हमारा हौसला बढ़ाया। जैनेंद्र जी के कार्यों को ब्लड मैन के रूप में देशभर में मशहूर मुकेश हिसारिया जैसे लोग आगे बढ़ा रहे हैं। केबीसी में मुकेश हिसारिया जी को अमिताभ बच्चन ने यूं ही नहीं बुलाया। आज किसी को भी रक्त की जरूरत हो, जेहन में पहला नाम उन्हीं का आता है। मेरी इच्छा है कि मैं मुकेश हिसारिया जी पर एक आलेख लिखूं। जैनेंद्र ने जिसकी नींव रखी थी, हम उसे सदैव जिंदा रखेंगे। मां ब्लड सेंटर से जुड़े हर व्यक्ति का जैनेंद्र ज्योति मेमोरियल फाउंडेशन हर सहयोग के लिए आभार व्यक्त करता है।”

रक्तदाताओं की मुस्कान देखिए, रक्तदान कीजिए

रक्तदान की शुरुआत करते डॉ. अमित कुमार बंका। दाएं आयकर अधिवक्ता विकास मैजरवार।
स्व. जैनेंद्र ज्योति की याद में रक्तदान करते निखिल रंजन और अंशुमन सुमन।
रक्तदान करते रवि कुमार और अरुणेश मिश्रा।
सेजल कुमारी और अनुप्रिया गुप्ता मां ब्लड सेंटर में रक्तदान करती हुईं।
पत्रकार अंकिता सिंह और खेल के वरिष्ठ पत्रकार नवीन चंद्र मनोज रक्तदान करते हुए।
रक्तदान करते जैनेंद्र ज्योति मेमोरियल फाउंडेशन के रोहन आनंद और चंद्रजीत गौरव।
स्व. जैनेंद्र ज्योति की याद में ब्लड डोनेशन कर रहे बलवीर सिंह और अनीश कुमार।
रक्तदान से जैनेंद्र ज्योति को श्रद्धांजलि देने पहुंचे शिक्षक अभिषेक कुमार और पत्रकार देश दीपक।
रजनीश कुमार और कुंदन कुमार ने मां ब्लड सेंटर में रक्तदान से स्व. जैनेंद्र ज्योति को किया याद।
शिविर में रक्तदान करते हुए शैल और एस. सौरभ।
मां ब्लड सेंटर में रक्तदान करते प्रिंस कुमार और मो. तहसीन।
रक्तदान करते महेश लाल और कुमार केसरी।
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रक्तदान शिविर में ब्लड डोनेट करते बबन सिंह और सुशील कुमार।
अजीत कुमार और आकाश कुमार ने भी इस मौके पर रक्तदान किया।
सात्विक सिंह और मोहित झा मां ब्लड सेंटर में रक्तदान करते हुए।
मां ब्लड बैंक में रक्तदान करते दीपक कुमार।
दरियापुर स्थित मां ब्लड सेंटर में रक्तदान करते अतुल कुमार और सोनू।
भागलपुर से रक्तदान करने आए मोहित साह और अधिवक्ता पंकज मैजरवार।
विवेकानंद कुमार और रौनक कुमार ने भी रक्तदान कर श्रद्धांजलि दी।
मां ब्लड सेंटर में रक्तदान करते सुभाष कुमार और मुन्ना कुमार।
रक्तदान करते देवेंद्र सिंह और नवीन कुमार।
मां ब्लड सेंटर में रक्तदान करते दीपक कुमार और ललन।
मां ब्लड सेंटर में रक्तदान करते माणिक कुमार और विद्यासागर।
मां ब्लड बैंक में रक्तदान करते संजय कुमार।
स्व. जैनेंद्र ज्योति को याद करते बड़े भाई कुमार जितेंद्र ज्योति ने रक्तदान किया। साथ में पत्रकार आदित्य आनंद।

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