Bihar Teacher News : KK Pathak के खिलाफ लड़ाई में निशाने पर शिक्षक, ‘हवाई आंदोलन’ की निकली हवा

रिपब्लिकन न्यूज, पटना

by Republican Desk

Bihar News में खबर Bihar Teacher News के आंदोलन से जुड़ी हुई। School Time पर IAS KK Pathak के खिलाफ हवाई आंदोलन की हवा कैसे निकली, उसे समझ लीजिए।

संदेश साफ, नेतागिरी नहीं चलेगी… (फोटो क्रेडिट : रिपब्लिकन न्यूज)

CM, मंत्री, विधायक…सब हो गए फेल, KK Pathak नहीं हिले

मुख्यमंत्री ने सदन में कहा, पाठक जी नहीं माने। मंत्री ने कहा, पाठक जी नहीं हिले। विधायक और विधान पार्षद तलवारें भांजते रहे, पाठक जी नहीं डिगे। अब शिक्षकों ने स्कूल की टाइमिंग पर बवाल किया तो शिक्षकों के हवाई आंदोलन की हवा निकल गई। हवाई इसलिए क्योंकि आंदोलन की नींव सोशल मीडिया पर रखी गई और सोशल मीडिया पर ही आंदोलन ने दम तोड़ दिया। उल्टे विभाग के रडार पर शिक्षक आ गए हैं। पटना की एक शिक्षिका को सोशल मीडिया पर विभाग के फैसले के खिलाफ बोलने के मामले में कार्रवाई का दर्द झेलना पड़ रहा है।

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School Time पर बवाल, KK Pathak का स्टैंड क्लियर

शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक ने स्कूल टाइमिंग बदल दिया। विभागीय आदेश में सुबह 6 से दोपहर 1.30 बजे तक शिक्षकों को ड्यूटी बजाने का आदेश मिला। आदेश जारी होते ही सोशल मीडिया पर शिक्षकों का विरोध शुरू हुआ। शिक्षक नेता विद्यालय अध्यापक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अमित विक्रम ने आंदोलन की अगुवाई की। सोशल मीडिया प्लेटफार्म X पर ट्वीट की बाढ़ आ गई। 12 विधान पार्षदों को चेतावनी दी गई कि अगर आदेश वापस नहीं हुआ तो इन विधान पार्षदों के खिलाफ आंदोलन किया जाएगा। तमाम विरोध सोशल मीडिया तक ही सीमित रहा। ऐसे में इस हवाई आंदोलन की हवा भी जल्दी ही निकल गई। केके पाठक अपने फैसले से एक कदम पीछे नहीं हटे। न तो स्कूल टाइमिंग पर उन्होंने स्टैंड पीछे लिया और न ही अपने खिलाफ चल रहे हवाई आंदोलन को तरजीह दी। लिहाजा शिक्षकों का हवाई आंदोलन हवा में ही खत्म हो गया।

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शिक्षिका पर गिरी गाज, संदेश साफ, नेतागिरी नहीं चलेगी…

सोशल मीडिया पर विभागीय आदेश के खिलाफ बोलने के कारण पटना की शिक्षिका सीमा कुमारी पर गाज गिरी है। बांकीपुर गर्ल्स स्कूल की शिक्षिका सीमा कुमारी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए जिला कार्यक्रम पदाधिकारी ने 7 दिनों का वेतन काटने का आदेश जारी कर दिया। इसके साथ ही उन्हें तलब भी किया गया है। जवाब संतोषजनक नहीं हुआ तो अनुशासनिक एक्शन भी तय है। ऐसे में संकेत साफ है कि नौकरी के बजाए अगर आदेश पर आवाज उठाने की गलती हुई तो कार्रवाई के डंडे से हांका जाएगा। ऐसे में इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि आईएएस केके पाठक के फैसले के आगे शिक्षकों का आंदोलन एक बार फिर दम तोड़ चुका है।

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