Bihar News : जाली प्रमाण-पत्र कांड में अंचलाधिकारी बर्खास्त, मंत्रिपरिषद की मंजूरी के बाद सेवा समाप्त, डिप्टी सीएम विजय सिन्हा की चेतावनी

रिपब्लिकन न्यूज, पटना

by Jyoti
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Bihar News : जाली शैक्षणिक प्रमाण-पत्र के आधार पर सरकारी सेवा प्राप्त करने के मामले में राज्य सरकार ने कड़ा कदम उठाते हुए सुपौल सदर के पूर्व अंचलाधिकारी प्रिंस राज को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। मंत्रिपरिषद की स्वीकृति मिलने के बाद राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने उनकी सेवा तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का आदेश जारी कर दिया।

Vijay Sinha : शैक्षणिक प्रमाण पत्र में फर्जीवाड़ा करने वाले सीओ प्रिंस राज बर्खास्त

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री सह उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि सरकार की नीति स्पष्ट है। सरकारी सेवा में जालसाजी, कूटरचना या फर्जी प्रमाण-पत्र के लिए शून्य सहनशीलता अपनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता से कोई समझौता नहीं होगा और धोखाधड़ी कर सेवा में आने वाले व्यक्तियों के खिलाफ विधि सम्मत कठोर कार्रवाई की जाएगी। विभागीय अभिलेखों के अनुसार, प्रिंस राज (पिता—रघुनंदन साह, ग्राम झिक्की, पोस्ट हिसार, जिला मधुबनी) ने बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित 60-62वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में चयन के दौरान वर्ष 2006 की मैट्रिक परीक्षा का अंकपत्र प्रस्तुत किया था। यह परीक्षा उन्होंने एसटीएसवाई हाई स्कूल, मनमोहन (मधुबनी) से पास बताई थी।

Revenue And Land Reforms Bihar : दो नामों से प्रमाण पत्र देकर अंचल अधिकारी बने थे प्रिंस राज

जांच में सामने आया कि वर्ष 2004 में उन्होंने धर्मेंद्र कुमार नाम से हाई स्कूल, खिड़हर (मधुबनी) से मैट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण की थी। इस प्रकार उन्होंने दो अलग-अलग नाम और जन्मतिथि से परीक्षा देने का आरोप झेला। विशेष निगरानी इकाई द्वारा दर्ज कांड संख्या 04/2025 की जांच में यह तथ्य सामने आया कि वर्ष 2006 का प्रमाण-पत्र जाली था और उसी के आधार पर आयु व शैक्षणिक योग्यता सिद्ध की गई थी। निर्णायक मोड़ तब आया जब बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने 1 अगस्त 2025 को वर्ष 2006 की माध्यमिक परीक्षा का अंकपत्र और प्रमाण-पत्र जालसाजी पाते हुए रद्द कर दिया। इसके बाद विभाग ने आयोग से मंतव्य प्राप्त किया, जिसमें चयन रद्द करने के लिए विभाग को स्वतंत्र बताया गया।

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Circle Officer Prince Raj : 2019 में बीपीएससी के जरिए नियुक्ति, अब सेवा से मुक्त

नियुक्ति अधिसूचना में स्पष्ट प्रावधान था कि यदि अभ्यर्थी द्वारा प्रस्तुत प्रमाण-पत्रों में त्रुटि या प्रतिकूल तथ्य पाए जाते हैं तो सेवा बिना पूर्व सूचना के समाप्त की जा सकती है। इसी आधार पर विभाग ने निष्कर्ष निकाला कि संबंधित अधिकारी सेवा में बने रहने का अधिकार खो चुके हैं। प्रिंस राज की नियुक्ति वर्ष 2019 में हुई थी। प्रशिक्षण के बाद उनका पहला पदस्थापन पश्चिम चंपारण के चनपटिया में राजस्व अधिकारी के रूप में हुआ। बाद में विभिन्न पदों पर पदस्थापन हुआ और वर्ष 2023 में सेवा संपुष्ट भी कर दी गई थी। हालांकि प्रमाण-पत्र रद्द होने के बाद उनकी नियुक्ति स्वतः अवैध हो गई। शुक्रवार को मंत्रिपरिषद से अनुमोदन मिलने के बाद राज्य सरकार ने उन्हें तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया। सरकार ने इसे प्रशासनिक शुचिता बनाए रखने और जनता का विश्वास मजबूत करने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई बताया है।

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