Bihar News : मंत्री अशोक चौधरी ने असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में ज्वाइन कर लिया है। उनकी नियुक्ति पर उठ रहे सवालों के बीच आख़िरकार मंत्री की नियुक्ति और ज्वाइनिंग दोनों हो गई है।

Ashok Choudhary : मंत्री अशोक चौधरी ने पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय में दिया योगदान
बिहार सरकार में मंत्री जेडीयू नेता अशोक चौधरी ने नई भूमिका संभालते हुए पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय में सहायक प्राध्यापक के पद पर योगदान दे दिया है। इसकी जानकारी उन्होंने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट कर स्वयं साझा की। अपने पोस्ट में उन्होंने लिखा कि यह उनके लिए नई जिम्मेदारी और नया संकल्प है तथा विश्वविद्यालय में शिक्षण कार्य शुरू करना उनके लिए गर्व और खुशी का क्षण है। उन्होंने अपने संदेश में मगध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एस. पी. शाही सहित पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के कुलपति और कुलसचिव का आभार भी व्यक्त किया।
Patliputra University : दो नाम के कारण अशोक चौधरी की नियुक्ति पर था विवाद
जानकारी के अनुसार, सहायक प्राध्यापक पद पर नियुक्ति का मामला कई वर्षों से लंबित था। मुख्य कारण उनके नाम से जुड़े दस्तावेजों में विसंगति बताई जा रही थी। शैक्षणिक प्रमाणपत्रों में उनका नाम अशोक कुमार जबकि चुनावी हलफनामे में अशोक चौधरी दर्ज था। इसी नाम अंतर के कारण फाइल विभाग में अटकी हुई थी। अब उनके जॉइन करने से स्पष्ट हो गया है कि सभी आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन पूरा हो चुका है और आपत्तियां समाप्त कर दी गई हैं।
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Ashok Choudhary Controversy : दस्तावेज विवाद बना था सियासी मुद्दा
सहायक प्राध्यापक पद के लिए भर्ती प्रक्रिया बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग द्वारा वर्ष 2020–21 में शुरू की गई थी। राजनीति शास्त्र विषय में 280 पदों के लिए विज्ञापन जारी हुआ था। परीक्षा के बाद वर्ष 2025 में परिणाम घोषित किया गया, जिसमें कुल 276 अभ्यर्थियों का चयन हुआ। इनमें अशोक चौधरी का नाम भी शामिल था। हालांकि दस्तावेज संबंधी विवाद के कारण उनकी नियुक्ति पर रोक लग गई थी, जिसको लेकर राजनीतिक हलकों में भी चर्चा होती रही। अब सभी औपचारिकताएँ पूरी होने के बाद उन्होंने विश्वविद्यालय में योगदान दे दिया है।