BAS Promotion की सूची में देखें कौन अब बने अपर समाहर्ता, उप सचिव, उप सचिव, संयुक्त सचिव और विशेष सचिव

by Republican Desk

Bihar News में नीतीश कुमार सरकार का प्रोन्नति अभियान देखिए। एक साथ पांच अधिसूचनाओं से बिहार प्रशासनिक सेवा के 523 अफसरों को प्रामोशन दिया गया।

Bihar CM Nitish Kumar
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कैबिनेट ने 13 अक्टूबर को प्रोमोशन का नया फॉर्मूला लागू किया था।

बिहार की महागठबंधन सरकार ने 2016 से आरक्षण को लेकर कोर्ट में अटकी राज्यकर्मियों की प्रोन्नति का रास्ता राज्य मंत्रिमंडल के फैसले के जरिए खोला तो सामान्य प्रशासन विभाग (GAD Bihar) में अचानक खलबली मच गई। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने इस रास्ते पर चलते हुए दो महीने के अंदर प्रोन्नति की पूरी प्रक्रिया को पूरा करने का निर्देश दिया है, जिसके कारण दिन-रात इसपर काम चल रहा है। मंगलवार को इसी गति के कारण बिहार प्रशासनिक सेवा (Bihar Administrative Service) के 532 अधिकारियों को प्रोन्नति (Promotion today in Bihar) के साथ उच्चतर वेतनमान दिया गया। बिप्रसे (BAS Officer) में कौन क्या थे और अब क्या बनाए गए, उसकी पूरी सूची आगे है।

कितने अफसर क्या बने, नीचे क्लिक कर देखें
मंगलवार को अधिसूचना संख्या 19518 के जरिए 20 बिप्रसे अधिकारियों को विशेष सचिव बनाया गया। उसके बाद बिहार प्रशासनिक सेवा के 39 अफसरों को अपर सचिव में प्रोमोशन देने के लिए अधिसूचना संख्या 19519 जारी की गई। फिर 157 बिप्रसे अफसरों को संयुक्त सचिव बनाते हुए अधिसूचना संख्या 19520 जारी हुई। सामान्य प्रशासन विभाग की अधिसूचना संख्या 19521 के जरिए सर्वाधित 249 बिप्रसे अधिकारियों को अपर समाहर्ता के रूप में प्रोमोशन मिला। इसके बाद अधिसूचना संख्या 19522 के जरिए सामान्य प्रशासन विभाग ने 67 अधिकारियों को उप सचिव बनाया।

उच्चतर काम कर रहे थे, पद-वेतन नहीं मिलता था
यह अधिकारी अबतक उच्चतर पदों पर काम करते हुए भी प्रोन्नति या उच्चतर वेतन के हकदार नहीं थे, क्योंकि आरक्षण के कारण प्रोन्नति का मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। राज्य सरकार ने लंबित केस में 17 प्रतिशत आरक्षण को देखते हुए उस प्रतिशत की सीटों को सुरक्षित छोड़कर बाकी 83 प्रतिशत सीटों के लिए प्रोन्नति की अस्थायी स्थानापन्न कार्यकारी व्यवस्था दी। इस 83 प्रतिशत में 17 प्रतिशत को अलग से आरक्षण दिया गया है। इस प्रोन्नति के साथ सरकार ने शर्त रखी है कि अगर सुप्रीम कोर्ट इसे नकारता है तो प्रोन्नति से मिला पद वापस ले लिया जाएगा, हालांकि इस क्रम में मिला वेतन वापस नहीं लिया जाएगा।

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