Bihar Police में घोटाला! सामने लाने वाली DIG को पड़ी गालियां, DG ने रची फंसाने की साजिश

by Republican Desk

Bihar News में इस वक्त की बड़ी खबर होमगार्ड एवं फायर सर्विसेज के राज्य मुख्यालय से। यएक IAS अधिकारी ने अपने डीजी पर आरोप लगाया है कि 6.5 करोड़ का घोटाला पकड़ने पर उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है।

डीजी शोभा ओहतकर को लोग शोभा अहोतकर भी बोलते हैं। (फाइल फोटो)

बिहार में भारतीय पुलिस सेवा (IPS) की सीनियर अधिकारी और होमगार्ड एवं फायर सर्विसेज की महानिदेशक (DG) शोभा ओहतकर एक बार फिर विवादों में घिर गई हैं। अब उनके मातहत काम कर रहीं एक महिला पुलिस उप-महानिरीक्षक (DIG) अनुसूइया रणसिंह साहू ने प्रताड़ना का आरोप लगाया है। गालियां देने और कॅरियर खराब करने के अलावा बार-बार फंसाने की कोशिश करने का भी आरोप है। यह आरोप डीआईजी अनुसूइया ने त्राहिमाम संदेश के रूप में अपनी डीजी शोभा ओहतकर को ही लिखा है, लेकिन साथ-साथ इसकी प्रति राज्य के मुख्य सचिव तक को भेज दी है। इसमें उन्होंने जिक्र किया है कि अग्निशमन वाहनों की खरीदारी में साढ़े छह करोड़ का घोटाला पकड़ने के बाद डीजी ओहतकर नाराज हो गईं और गालियां देने लगीं। मार्च में वह घोटाला सामने लाने के बाद संबंधित टेंडर तो रद्द कर दिया गया, लेकिन प्रताड़ना का सिलसिला चालू हो गया।

होमगार्ड एवं फायर सर्विसेज में पदस्थापित डीआईजी अनुसूइया रणसिंह साहू ने बिहार के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव, विशेष सचिव और सचिव को भी इस त्राहिमाम संदेश की प्रति भेजी है। त्राहिमाम संदेश में डीआईजी ने बताया कि मार्च 2023 में होमगार्ड एवं फायर सर्विसेज में ज्वाइनिंग के बाद महज 15 दिनों तक ही वह ठीकठाक रहीं। डीजी के साथ उन 15 दिनों के मधुर संबंध के बाद क्या हुआ, यह अनुसूइया ने विस्तार से लिखा है। लिखा है कि उन्हें डीजी ने ज्वाइनिंग के 15 दिनों के बाद लगभग 15 फाइलें समीक्षा के लिए दी। इसकी समीक्षा करनी थी। देखने लगी तो फायर फाइटर वाहनों की खरीदारी के टेंडर की फाइल में कई विसंगतियां नजर आयीं।

एक ही तरह की गाड़ी-सुविधा के लिए तीन अलग टेंडर मंगाकर सरकार को करीब साढ़े छह करोड़ की चपत लगायी जाती दिखी तो डीजी को बताना जरूरी समझा। उन्होंने लिखा है कि मुझे विसंगतियां दिखीं और जब बिहार सरकार के वित्त परामर्शी से सलाह ली तो उन्होंने साफ कहा कि यह आज नहीं तो कल ऑडिट में पकड़ा ही जाएगा। ऐसे में डीजी को जब बताया कि यह गड़बड़ी दिखी है और इस बारे में वित्त परामर्शी से कॉल पर सलाह भी ले चुकी हूं तो लगभग डेढ़ घंटे तक डीजी ने लगातार गालियां दी। कहा कि विकास वैभव जैसे बाकी अधिकारियों को याद कर लो कि कोई मेरे सामने नहीं टिका। उसी तरह कॅरियर खराब करने की धमकियां दी गईं तो तनाव के कारण तबीयत खराब हो गई और उस समय पति आकर अस्पताल ले गए।

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